Ram Ji Ki Aarti

हैलो फ्रेंड्स कैसे हो आप सब आज हम बात करेंगे Ram Ji Ki Aarti श्री राम अवतार थे भगवान विष्णु ने त्रेतायुग के समय में राजा दशरत के पुत्र के रूप में जन्म लिया था राम अवतार में भगवान विष्णु ने रावण नाम के असुर को मरने के लिए अवतरित हुए थे जोकि भगवान शिव का परम भक्त था जिससे भगवान शिव ने यह वरदान दिया था की उसे न कोई देव,दानव ,नाग,किनार,गधर्व कोई भी उसे मार नहीं सकता था जिस कारण उसे किसी का भय नहीं था। उन्होंने अपने जीवन काल में १४ वर्ष का बन वास काट जिसमे उनके साथ माता सीता एवं उनके भाई लक्ष्मण उनके साथ गए थे बन-वास के समय में उनकी पत्नी को रावण नाम का असुर हर कर ले आता है एवं भगवान राम हनुमान एवं उनकी सेना की सहायता से रावण के सेना से युद्ध कर पाते है ओर भगवान राम रावण का वध कर देते है। तो चलिए बढ़ते है Ram Ji Ki Aarti की - 

Ram Ji Ki Aarti
Ram Ji Ki Aarti

श्री राम आरती इन हिन्दी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम।
नव कंज लोजन, कंज-मुख कर-कंज पद-कंजारुणाम।।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम।

कंदर्प अगणित अमित छवि,नव निल नारद सुंदरम।
पटपीत मनहुँ तड़ित रूचि-शुचि नोमी जनक सुतावरम।।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम।

भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम।
रघुनंद आनंदकन्द कौशलचंद दशरथ-नंदनम।।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम।

सर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम।
आजानुभुज शर चाप-धार,संग्राम जित खरदूषणम।।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम।

इति वदित तुलसीदास शंकर-शेष-मुनि-मन-रंजनम।
मम ह्रदय कंज निवास करू, कामदी खाल दल गंजनम।।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम।

मन जाहि राजेऊ मिलहि सोवर सहज सुन्दर सांवरो।
करुणा निधन सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो।।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम।

एहि भांति गौरी असीम सुन सिय सहित हिय हरषी।
तुलसी भवानिह पुजी पुनि-पुनि मुदित मन मंदिर चली।।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम।


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Conclusion:

हेलो फ्रेंड्स मैं आशा करता हूँ की आपको मेरी पोस्ट Ram Ji Ki Aarti अच्छी लगी होगी यदि आपका मेरी पोस्ट्स से लेकर कोई सवाल है तो आपका कमेंट बॉक्स मैं पूछ सकते हैं ।
धन्यवाद -