Krishna Chalisa

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हैलो फ्रेंड्स कैसे हो आप सब आज हम बात करेंगे भगवान Krishna Chalisa के विषय में श्री कृष्ण भगवान विष्णु के अवतार थे। भगवान विष्णु ने कृष्णा अवतार कंस नाम के असुर को मरने के लिया वासुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया था। कंस को यह बात का ज्ञात हो चुका था की उसकी बहन का आठवीं संतान ही उसकी मौत का कारण सिद्ध होगा जिसके चलते उसने बहन व जीजा को कारागार में बंद कर दिया था इसी प्रकार उसने अपनी बहन की सभी संतानों की एक - एक करके हत्या कर दी थी साथ संतानों के हत्या करने के बाद कृष्णा का जन्म हुआ। कृष्णा के पिता वासुदेव अपने मित्र नन्द के पास छोड़ आये थे एवं अपने मित्र नन्द की पुत्री को बदले में ले आये जिसे कंस मरने में सफल हो गया था। कुछ वर्षों बाद कृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर दिया। कृष्णा ने अपने जीवन काल मैं महाभारत के समय भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था वे अर्जुन के सारथी भी बने थे। तो चलिए बढ़ते है कृष्णा चालीसा की ओर जिससे भगवान कृष्णा अति प्रसन्न होते है। श्री Krishna Chalisa इन हिंदी -

श्री कृष्ण चालीसा

|| दोहा ||

बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तनु श्याम |
अरुण अधर जनु बिम्ब फल, नयन कमल अभिराम ||

पूर्ण इंद्र, अरविन्द मुख, पीतांबर शुभ साज |
जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णा चंद्र महाराज ||

|| चोपाई ||

जय यदुनंदन जय जगवंदन | जय वासुदेव देवकी नंदन ||
जय यशुदा सूत नन्द दुलारे | जय प्रभु भक्तन के रखवारे ||
जय नट-नगर नाग नथैया | कृष्णा कन्हैया धेनु चरैया ||
पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो | आओ दिनन कस्ट निवारो ||
बंसी मधुर अधर धरी तेरो | होव पूर्ण मनोरथ मेरो ||
आओ हरि पुनि माखन खाओ | आज लाज भक्तन की राखो ||
गोल कपोल, चिबुक अरुणारे | मृदु मुस्कान मोहिनी डारे ||
रंजित राजीव नयन विशाला | मोर मुकुट वैजयंती माला ||
कुण्डल श्रवण पीतपट आछे | कीट कीकाणी काछन काछे ||
नील जलज सुन्दर तनु सोहे | छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे ||
मस्तक तिलक, अकल घुंघराले | आओ श्याम बांसुरी वाले ||
करि पय पान, पुतनहि तारयो | अका बका कागासुर मारयो ||
मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला | भै शीतल, लखितन्हि नंदलाला ||
जब सुरपति ब्रज चढयो रिसाई | मूसर धार वारि बरसाई ||
लखत-लखत ब्रज चहत बहायो | गोवर्धन नखधारि बचायो ||
लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई | मुख महं चौदह भुवन दिखाई ||
दुष्ट कंस अति उधम मचायो | कोटि कमल कहूं फूल मंगायो ||
नाथि कालियन्हि तब तुम लीन्हे | चराणचिन्ह दे निर्भय कीन्हे ||
करि गोपिन संग रास विलासा | सबकी पुराण की अभिलाषा ||
अगणित महा असुर संहारयो | कंसहि केस पकड़ दे मारयो ||
मत-पिता को बंदी छुड़ायो | उग्रेसन कान्ह राज दिलाई ||
माहि से मर्तक छूहो सुत लायो | मातु देवकी शोक मिटायो ||
नरकासुर मुर थल संहारी | लाये षट दश सहसकुमारी ||
दे भिन्ह तृण चीर सहारा | जरासंध राक्षस कन्ह मारा ||
असुर बकासुर आदिक मारयो | निज भक्तन कर कस्ट निवारियो ||
दीन सुदामा के दुःख टारयो | तंदुल तीन मुठी मुख डारयो ||
दुर्योधन के त्याग्यो मेवा | कियो विदुर शांत कलेवा ||
लखि प्रेम की महिमा भारी | ऐसे श्याम दीन हितकारी ||
भारत में पार्थ रथ हांके | लिए चक्र कर नहीं बल ताके ||
निज गीता के ज्ञान सुनाये | भक्तन ह्रदय सुधा सरसाये ||
मीरा थी ऐसी मतवाली | विष पि गयी बजाकर ताली ||
राणा भेजा सांप पिटारी | शालिग्राम बने बनवारी ||
निज माया तुम विधिहिं दिखायो | उर ते संशय सकल मिटायो ||
तब शत निंदा करी तत्काला | जीवन मुक्त भयो शिशुपाला ||
जबहि द्रौपदी टेर लगाई | दीनानाथ लाज अब जाई ||
तुरतहि वसन बने नंदलाला | बढे चीर भै अरि मुंह काला ||
अस अंत के नाथ कन्हैया | डूबत भंवर बचावाई नैया ||
सुन्दरदास आस उर कुमति निवारो | क्षमहु  बेगि अपराध हमारो ||
खोले पट अब दर्शन दीजे | बोलो कृष्णा कन्हैया की जय ||

|| दोहा ||

यह चालीसा कृष्ण का पाठ करे उर धारि |
अष्ट सिद्धि नवनिधि, लहे पदार्थ चारि ||


Krishna Chalisa

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Conclusion:

हेलो फ्रेंड्स मैं आशा करता हूँ की आपको मेरी पोस्ट श्री कृष्णा चालीसा अच्छी लगी होगी यदि आपका मेरी पोस्ट्स से लेकर कोई सवाल है तो आपका कमेंट बॉक्स मैं पूछ सकते हैं ।
धन्यवाद -