Budhwar Vrat Katha

हैलो फ्रेंड्स कैसे हो आप सब ? आज हम बात करने वाले हैं Budhwar Vrat Katha के बारे में बुधवार के दिन भगवन गणेश की पूजा की जाती है एवं बुधवार के दिन बुध ग्रह की पूजा भी जाती है। बुधवार के दिन व्रत करने से धन की कमी को दूर किया जाता है। 21 या 41 बुधवार तक व्रत रखें एवं उसके बाद विधिपूर्वक उद्यापन करें। व्रत के दौरान फलाहार का सेवन करे एवं शाम को पूजा करने के बाद व्रत खोलते समये को हरी सब्जी, दही अथवा मुंग की दाल के हलवे का ग्रहण करे। तो चलिए बढ़ते है  Budhwar Vrat Katha की ओर -

Budhwar Vrat Katha
Budhwar Vrat Katha

Budhwar Vrat Katha

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय की बात है जब एक धनी मधुसूदन नामक व्यक्ति अपनी पत्नी को विदा करवाने के लिए अपनी ससुराल गया था। वहां जाकर वो कुछ दिन रहा और फिर अपने सास-ससुर से अपनी पत्नी को विदा करने को कहा, लेकिन वहां पर सबने कहा कि आज बुद्धवार का दिन है आज के दिन विदाई नहीं करनी चाहिए, परन्तु वो व्यक्ति नहीं माना और जबरदस्ती करके बुद्धवार के दिन ही पत्नी को विदा करवा कर अपने घर की तरफ चल पड़ा, रास्‍ते में उसकी पत्नी को प्यास लगी, तो वो व्यक्ति लोटा लेकर रथ से उतरकर पानी लेने के लिए चला गया। जैसे ही वो पानी लेकर अपनी पत्नी के पास लोट कर आया तो वो ये देखकर आश्चर्यचकित रह गया कि उसके ही जैसी सूरत और वेश-भूषा वाला एक अन्य व्यक्ति उसकी पत्नी के साथ रथ में बैठा हुआ है।


वो अति क्रोधित हुआ और उसने क्रोध से कहा, तूम कौन ओर मेरी पत्नी के निकट कैसे बैठा हुए हो? दूसरा व्यक्ति बोला, यह मेरी पत्नी है। इसे मैं अभी-अभी ससुराल से विदा करवा कर ले जा रहा हूँ। वे दोनों व्यक्ति  आपस में लगे,

तभी उस राज्य के सिपाही आकर रथ के निचे खड़े वाले व्यक्ति को पकड़ने लगे स्त्री से पूछा, तुम्हारा असली पति कौन है? तब पत्नी शांत रही, क्योंकि दोनों एक जैसे थे, वह किसे अपना असली पति बताती, वह व्यक्ति ईश्वर से प्रार्थना करता हुआ बोला, हे परमेश्वर! यह क्या लीला है कि सच्चा झूठा बन रहा है, तभी आकाशवाणी हुई कि मूर्ख आज बुद्धवार के दिन तुझे वापिस नहीं आना चाहिए था, पर तूने किसी की बात नहीं मानी और चल पड़ा।


यह सब लीला बुद्ध देव भगवान की है, तब उस व्यक्ति ने बुद्ध देव जी से प्रार्थना की, उसने अपनी गलती के लिए क्षमा भी मांगी, तब बुद्ध देव जी अन्तर्ध्यान हो गए इसके बाद वह व्‍यक्ति अपनी स्त्री को लेकर घर आया आ गया। इसके बाद से ही वे दोनों पति-पत्नी हर सप्‍ताह प्रत्येक बुद्धवार के दिन नियमपूर्वक करने लगे, मान्‍यता है कि जो व्यक्ति इस कथा को सुनता है और औरों को भी सुनाता है, उसको बुद्धवार के दिन यात्रा करने का कोई दोष नहीं लगता है और उसको सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं।



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Conclusion:

हेलो फ्रेंड्स मैं आशा करता हूँ की आपको मेरी पोस्ट Budhwar Vrat Katha अच्छी लगी होगी यदि आपका मेरी पोस्ट्स से लेकर कोई सवाल है तो आपका कमेंट बॉक्स मैं पूछ सकते हैं ।
धन्यवाद -