Sai Vrat Katha

हैलो फ्रेंड्स कैसे हो आप सब आज हम बात करेंगे Sai Vrat Katha के विषय में साईं बाबा ने अपने जीवन काल में अनेको चमत्कार किये थे। Sai Baba ने अपना जीवन यापन एक फिकिर के सामान व्यतीत किया था वे शिरडी नामक एक गाँव में रहते थे एवं सबका मालिक एक जाप निरंतर किया करते थे। गुरूवार के दिन साईं बाबा की पूजा करना अति शुभ दिन माना जाता है। 9 गुरूवार तक व्रत रखें एवं उसके बाद विधिपूर्वक उद्यापन करें। व्रत के दौरान फलाहार का सेवन करे एवं शाम को पूजा करें प्रसाद के रूप में लाडू का भोग लगाए बाद में व्रत खोलने से पूर्व समये को लड्डू का सेवन करे, दही एवं भोजन को ग्रहण करे। तो चलिए बढ़ते है Sai Vrat Katha ओर जिससे साईं बाबा प्रसन्न होते है।

Sai Vrat Katha

Sai Vrat Katha

Sai Vrat Katha

कोकिला नामक स्त्री गुजरात के एक शहर में अपने पति महेश भाई के साथ रहती थी। दोनों एक दूसरे से प्रेम भी करते थे किन्तु महेश भाई एक झगड़ालू किस्म के इंसान थे। वहीँ दूसरी तरफ कोकिला बहन बहुत ही धार्मिक स्त्री थी, भगवान पर विश्वास रखती एवं बिना कुछ कहे सब कुछ सहन लेती थी। धीरे-धीरे उनके पति का धंधा-रोजगार ठप हो गया था। कुछ भी कमाई नहीं हो रही थी। महेशभाई अब दिन-भर घर पर ही रहते थे एवं अब वे गलत राह पर चल पड़े थे। अब उनका स्वभाव पहले से भी अधिक चिड़चिड़ा हो चका था।

एक दिन दोपहर के समय एक बुजुर्ग इंसान  दरवाजे पर आकर खड़ा होकर कोकिला बहन से दाल चावल मांगने लगा, शांत और धार्मिक स्वभाव होने के कारण कोकिला बहन ने चावल और दाल उस बुजुर्ग को देकर अपने दोनों हाथों से उन्हें नमस्कार किया। यह देखकर उस बुजुर्ग इंसान ने उसे साईं बाबा सुखी रखें कहा।

यह सुनकर कोकिला बहन ने कहा बाबा सुखी रहना शायद मेरी किस्मत में ही नहीं है। इसके बाद वह अपने सारे दुख दर्द उस बुजुर्ग इंसान को बताने लगी। यह सुनकर उस बुजुर्ग आदमी ने कोकिला को साईं बाबा का व्रत रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इस व्रत को करने से उसके जितने भी कष्ट हैं, वह अवश्य दूर हो जाएंगे और बाबा का आशीर्वाद हमेशा उनके घर और उनके ऊपर बना रहेगा।

उस बुजुर्ग इंसान की बात सुनकर कोकिला बहन ने 9 गुरुवार तक व्रत किया। बाबा के बताएं हुए तरीके से सभी कार्यों को किया। थोड़े दिन के बाद ही कोकिला बहन का घर में फिर से सुख व समृद्धि से भर गया।उसकेबाद महेश भाई का बंद हुआ काम दोबारा से चालू हो गया। महेश भाई का स्वभाव भी पहले से बिल्कुल बदल गया था।

कुछ दिनों बाद कोकिला बहन के जेठ व जेठानी सूरत से आए और बात करने के दौरान उन्होंने अपने बच्चों के पढ़ाई लिखाई में ध्यान ना देने की बात कही। उन्होनें बताया कि पढ़ाई लिखाई में ध्यान ना देने के कारण बच्चे परीक्षा में सफल नहीं हो पा रहे हैं। ये बात सुनकर तब कोकिला बहन ने उन्हें 9 गुरुवार साईं बाबा के  व्रत रखने को कहा और साथ में उनकी महिमा का बखान भी बताया। उन्होनें कहा की साईं बाबा की भक्ति से उनके बच्चे अच्छी तरह से पढ़ाई लिखाई कर सकेंगे। लेकिन ऐसा करने के लिए साईं बाबा पर विश्वास होना बहुत जरूरी है। यह सुनकर कोकिला बहन की जेठानी व जेठ और उनके बच्चे ने भी साईं बाबा का व्रत करना शुरू कर दिया। कुछ दिन बाद सूरत से उनकी जेठानी की खबर आयी कि उनके बच्चें बहुत अच्छी तरह से पढ़ाई लिखाई करने लगें हैं। इस तरह साईं बाबा की महिमा से कोकिला बहन के साथ-साथ उनके जेठ-जेठानी की भी समस्या दूर हो गई और वह खुशी-खुशी से अपना जीवन व्यतीत करने लगे।

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